नुक्ताचीनी का नया पता

घबराईये नहीं नुक्ताचीनी बंद नहीं हुई, बस अब नई जगह होती है ! नुक्ताचीनी का नया पता है http://nuktachini.debashish.com नुक्ताचीनी की फीड का पाठक बनने हेतु यहाँ क्लिक करें

Friday, May 21, 2004

हिन्दी ब्लॉग‍ गीत

याज़ाद ने अनिल के एक चिट्ठे के हवाले से हिन्दी ब्लॉग‍ गीत की बात छेड़ी। तो अपन कहां पीछे रहने वाले थे। हाजिर है कुछ ब्लॉग गीतः

ये अपने बाप्पी दा इश्टाईल में:

ब्लॉगिंग बिना चैन कहां रेSSS
कॉमेन्टिंग बिना चैन कहां रेSSS
सोना नहीं चांदी नहीं, ब्लॉग तो मिला
अरे ब्लॉगिंग कर लेSSS

..ये कुछ अल्ताफ राजा की शैली:

तुम तो ठहरे बलॉगवाले
साथ क्या निभाओगे।
सुबह पहले मौके पे
नेट पे बैठ जाओगे।
तुम तो ठहरे बलॉगवाले
साथ क्या निभाओगे।

और ये जॉनी वॉकर का बयानः

जब सर पे ख्याल मंडराएं,
और बिल्कुल रहा ना जाए।
आजा प्यारे ब्लॉग के द्वारे,
काहे घबराए? काहे घबराए?

सुन सुन सुन, अरे बाबा सुन
इस ब्लॉगिंग के बड़े बड़े गुन
हर बलॉगर बन गया है पंडित
गूगल भी थर्राए।
काहे घबराए? काहे घबराए?

एकाध पैरोडी आप की ओर से क्यों न हो जाए?

Monday, May 17, 2004

खिसियानी बिल्ली...

सुषमा सवराज मय पतिदेव राज्य सभा से पलायन करना चाहती हैं। वे भाजपा के राजनीति के WWF में एक विदेशी से पटखनी खाने के बाद से बेचैनी महसूस कर रहीं थी। अंबिका सोनी ने चुटकी ली, "अरे परवाह कौन करता है, वैसे भी श्रीमान स्वराज के मेम्बरशिप के दो ही महीने बचे हैं।" दरअसल सारी नाराजगी वाजपेयी से है। सुषमा और उमा भारती जैसे कर्मठ (कट्टर पढ़ें) भाजपाई संघ की तरह ये मानते हैं भाजपा के हिंदूवादी तेवर नरम करने से ही बेड़ा गर्क हुआ। वाजपेयी का राजनीतिक सन्यास तो तय ही है, विहिप और तोगड़िया भी किसी भी एक्स वाई जेड को उनकी जगह देने के लिए राजी हैं जो हिन्दुवादी संगठनों को राजयोग की भस्मी चटा सकने की कुव्व्त रखता हो। हाशिए पर पड़े गोविंदाचार्य सोनिया विरोघ के पुरोधा बनकर मिस भारती का दिल जीतना चाहते होंगे शायद। सुषमा और उमा को मलाल ये भी है कि सोनिया के विदेशी मूल के सार्थक मुद्दे को पर्याप्त तूल न दे कर और महाजन की कंप्यूटरी पंडिताई के चक्कर में पड़कर ही भाजपा की चुनाव में मिट्टी पलीद हुई, तिस पर मुरली जैसे नेता को सर चढ़ाया गया जिनकी जमानत भी न बच सकी। पार्टी के भीतर जब इतने उहापोह हों और सबसे फिट नेता के लिए डार्विनी सरवाईवल का संग्राम चल रहा हो तो खिसिया जाना कौन सी बड़ी बात है!

Wednesday, May 12, 2004

पुरस्कार पखवाड़ा

बड़ा अच्छा पखवाड़ा रहा। यूं तो पहले भी कुछ ऐसे ईनामात मिले पर इस बार काफी दिनों बाद किस्मत ने साथ दिया लगता है। पहले तो प्राप्त हुआ भाषाईंडिया की ओर से माईक्रोसॉफ्ट वायरलेस कीबोर्ड और माउस (कहना पड़ेगा कि बहुत ही शानदार चीज है, हालांकि नामुराद कुरियर वालों ने ४ बैटरियां रास्ते में ही पार कर दीं) उनकी एक प्रतियोगिता में भाग लेने पर और दूसरा जेएफसी स्विंग्स पर एक पुस्तक जावारैन्च पर। उम्मीद की जाए कि ऐसे और भी मौके आयेंगे!

Monday, May 10, 2004

नए ब्लॉगर पर नुक्ता चीनी

नए ब्लॉगर के सलोने रूप की तारीफ तो मैं कर ही चुका हूँ, मुफ्त सेवा वालों को अनेक नई सुविधाओं जैसे टिप्पणी ‍(जो हेलोस्कैन के कारण मेरे तो किसी काम की नहीं), नए आकर्षक खाके, चिटठाकार के प्रोफाइल (जो ब्लॉगर समूह को सुदृढ करेंगे), नए टैग (मुझे पसंद आया, हाल के चिटठों वाला जिसके लिए मैंने अपना पकवान बना रखा था), चिट्ठे लिखने के लिए मैं या तो WBloggar का प्रयोग करता था या ब्लॉग दिस पैनल का तो इ‍पत्र से चिट्ठे प्रेषण की सुविधा फिलहाल तो मेरे काम की नहीं। एक नवेली चीज जो जँची वो है, पोस्ट पेज, सेटिंग > इनेबल पोस्ट पेजेस पर जाकर यदि आप इसे चालू कर देंगे तो आपकी स्थाई कड़ियां उस चिट्ठे को एक अलग पृष्ट पर दिखायेगी। चिटठे के प्रिव्यू की व्यवस्था भी लाजवाब है।

जो खलने वाली चीज है वो है चिट्ठे संपादित करते समय कैलेंडर द्वारा उनकी खोज की सुविधा का हटाना और पब्लिश करने में समय ज्यादा लगना। पर जैसा कि कहते हैं, दान की गाय के दांत नहीं गिना करते ;)

Sunday, May 09, 2004

सम्पूर्ण कायापलट

आज ब्लॉगर ने हैरत में डाल दिया। उनका डैशबोर्ड न केवल काम का है बल्कि बेहद हसीन भी है। इसके अलावा सम्पूर्ण कायापलट कर दिया है ब्लॉगर ने अपने रुप में। शायद थोड़ा सा ध्यान सरलीकरण की ओर दिया गया है। क्या आपने देखा?